ओबामा-मोदी की मुलाकातों पर भड़का ड्रैगन, 73 सालों से किसी चीनी नेता को नहीं मिला US कांग्रेस को संबोधित करने का मौका

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1943 के बाद से अब तक किसी भी चीनी नेता को यूएस कांग्रेस के संयुक्‍त संत्र को संबोधित करने के लिए नहीं बुलाया गया है।



अमेरिका और भारत की करीबी पर चीन भड़क गया है। चीन के सरकारी मीडिया में छपी खबरों के अनुसार, मोदी और आेबामा की मुलाकातों से चीन चिंतित है। उसने कहा है कि चीन को भला-बुरा कहकर भारत अपना सपना सच नहीं कर सकता है।

चीन मोदी के यूएस कांग्रेस को संबाेधित करने से भी खफा है। 1943 के बाद से अब तक किसी भी चीनी नेता को यूएस कांग्रेस के संयुक्‍त संत्र को संबोधित करने के लिए नहीं बुलाया गया है। 18 फरवरी, 1943 को चीन की तत्‍कालीन प्रथम महिला सूंग-मे-लिंग ने संबोधित किया था।

चीन के सरकारी अखबार ‘ग्‍लोबल टाइम्‍स’ ने बुधवार को लिखा कि भारत एक पक्ष को दूसरे के खिलाफ खड़ा करके नहीं उभर सकता। रिपोर्ट में लिखा है, “दो साल में अमेरिका की चार यात्राएं और राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ सात बैठकें- भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत और अमेरिका के संबंधों को अभूतपूर्व स्तर पर ले गए हैं। किसी एक पक्ष का समर्थन करना या किसी दूसरे पक्ष के खिलाफ खेमेबंदी करने से भारत का उदय नहीं होगा।”

अखबार ने आगे लिखा है, “चीन के साथ कई मुद्दों पर कॉम्‍प्‍टीशन के बावजूद भारत यह समझता है कि उसका बड़ा सपना चीन को भला-बुरा कहकर या उसे रोककर हकीकत में नहीं बदल सकता। इसकी जगह, उन्हें अपने हित के लिए सहयोग को विस्तार देना चाहिए, संभावनाओं को तलाशना चाहिए और आपसी विश्वास कायम करना चाहिए। चीन भारत के लिए एक प्रतिद्वंद्वी से ज्यादा सहयोगी है। यह चीन के प्रति भारत की मौलिक समझ बनाएगा।”

दादरी हत्याकांड: अखलाक के परिवार के खिलाफ गांववाले पहुंचे कोर्ट, एफआईआर दर्ज करने की मांग

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मथुरा की एक फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में सामने आया था कि मृतक मोहम्मद अखलाक के घर मिला मांस गाय या गोवंश के किसी पशु का ही था।


बिसाहड़ा गांव के एक समूह ने गुरुवार (9 जून) को अदालत में जाकर नौ महीने पहले मारे गए मोहम्मद अखलाक के परिवार के सदस्यों के खिलाफ कथित गौकशी के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। अखलाक के घर में गोमांस होने के संदेह पर उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। एक वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी ने बताया, ‘बिसाहड़ा के निवासियों ने आज गौतमबुद्ध नगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत आवेदन दिया और पुलिस को अखलाक के परिवार के सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध किया।

 धारा 156 (3) किसी मजिस्ट्रेट को उन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और फिर जांच करने का आदेश पुलिस को देने का अधिकार देती है जिनके नाम शिकायत में हैं। उन्होंने कहा कि अदालत 13 जून को मामले में सुनवाई करेगी। अधिकारी के अनुसार, ‘अखलाक के परिवार के सदस्यों को उनका जवाब देने का अवसर दिया जाएगा और उसके बाद अदालत फैसला करेगी कि पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की जरूरत है या नहीं।


पिछले सप्ताह बिसाहड़ा में एक महापंचायत में ग्रामीणों ने पुलिस को अखलाक के परिवार के सदस्यों के खिलाफ 20 दिन के अंदर प्राथमिकी दर्ज करने का अल्टीमेटम दिया था। इससे पहले मथुरा की एक फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में सामने आया था कि मृतक के घर मिला मांस गाय या गोवंश के किसी पशु का ही था।

चीन-भारत सीमा पर ITBP जवानों को मिली फॉर्च्‍युनर और इंडेवर जैसी SUV

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ऐसी एसयूवी आमतौर पर शहरी इलाकों में देखने को मिलती हैं। इन वाहनों की कीमत करीब 25-25 लाख रूपये हैं। 


चीन-भारत सीमा पर स्थित भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के ऊंचाई वाली चौकियों पर तैनात जवानों के इधर-उधर जाने के लिए महंगी एसयूवी मुहैया करायी गई है। ऐसी एसयूवी आमतौर पर शहरी इलाकों में देखने को मिलती हैं।

चार सफेद रंग की ‘स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल’ आईटीबीपी की ओर से तैनात की गई हैं। इनमें से दो टोयोटा फार्च्यूनर और दो फोर्ड इंडेवर हैं। इन वाहनों की कीमत करीब 25-25 लाख रूपये हैं। आईटीबीपी ने इन वाहनों को अपनी कुछ सीमा चौकियों पर तैनात किया है। इन चौकियों में लद्दाख सेक्टर में समुद्र तल से 13 हजार फुट की ऊंचाई पर बुर्तसे और दुंगती स्थित चौकियां तथा अरूणाचल प्रदेश में मेंचुका चौकी है जो छह हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित है।

आईटीबीपी के यहां स्थित मुख्यालय ने इन वाहनों का दुरूपयोग रोकने के लिए निर्देश जारी किया है कि जवान और अधिकारी इन वाहनों का इस्तेमाल केवल संचालनात्मक कार्यों के लिए करेंगे। आईटीबीपी के महानिदेशक कृष्ण चौधरी ने कहा कि बल के पास अपने सीमा स्थानों के लिए कई तरह के चार पहिया वाहन हैं जिसमें चार व्हील ड्राइव सुविधा वाले वाहन भी शामिल हैं। डीजल चालित एसयूवी में उच्च शक्ति के इंजन होते हैं और ऐसे वाहनों की जरूरत पर्वतीय क्षेत्रों में जल्द पहुंचने के लिए थी।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें ऐसी ऊंचाई के लिए कुछ उच्च शक्ति के वाहनों की जरूरत थी जहां नियमित वाहन किसी एसयूवी जितने दक्ष नहीं हैं। गृह मंत्रालय ने कुछ समय पहले हमारे प्रस्ताव को मंजूर कर लिया और हमने पहले बैच में चार ऐसे चार पहिया वाहन खरीदे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं आपसे कह सकता हूं कि हमारे जवानों के पास आवागमन के लिए जो ये स्मार्ट एवं शक्तिशाली वाहन हैं उसके मुकाबले मेरे सहित बल के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के पास भी ऐसे वाहन नहीं हैं।’’ एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एसयूवी के भीतर कुछ बदलाव किये गए हैं ताकि उसमें एक रेडियो संचार सेट लगाया जा सके और छह-सात जवान अपने हथियारों के साथ बैठे सकें।